SEBI Ka Full Form Kya Hota Hai – SEBI Full Form In Hindi

SEBI ka full form क्या है यह प्रश्न कई बार आपके जेहन में आया होगा। खासकर तब, जब कोई शेयर बाजार की बात करें SEBI (सेबी) एक महत्वपूर्ण संगठन है जो कि भारत में शेयर बाजार का और उसके निवेशकों का नियामक है | सरल भाषा में कहा जाए तो सेबी शेयर बाजार के निवेशकों का रक्षक है। SEBI का सबसे पहला काम है securities market (शेयर बाजार) को संरक्षण प्रदान करना। शेयर बाजार में रुचि रखने वाले व्यक्ति को सेबी की जानकारी अवश्य होती है। आजकल की generation आधुनिकता से भरपूर है पर शेयर बाजार में investment काफी समय पहले से चलती आ रही है|  लोगों में share market से profit कमाने का ट्रेंड काफी पुराना है जोकि आज भी ट्रेंडिंग है | अगर आप भी ऐसे ही एक investor है या शेयर मार्केट में नए हैं या शेयर मार्केट को समझने में रुचि रखते हैं तो SEBI ka full form और sebi क्या है इसके बारे में जानना आपके लिए अनिवार्य है।

sebi ka full form kya hota hai

SEBI ka full form aur sebi kya hai full information

SEBI ka full form, Securities Exchange Board of India होता है। जिसे हिंदी में “भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड” के नाम से जाना जाता है | Securities Exchange Board of India का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है शेयर मार्केट के निवेशकों को संरक्षण प्रदान करना | Stock Exchange के कार्य को नियमित करना | Stock brokers, share brokers, agents के कार्य को register और नियमित (regulate) करना | SEBI कैपिटल इन्वेस्टमेंट  जैसे सभी प्रकार  के investments ( निवेश )  को register  व  नियमित करता है | निवेशकों की शिक्षा व प्रशिक्षण का भी प्रचार करता है | सेबी एक ऐसा संगठन है जोकि self regulatory (आत्म नियामक) organizations का प्रचार करता है और उन्हें regulate भी करता है | किसी भी प्रकार की धोखेबाजी व गलत व्यापार को रोकना भी सेबी का अनिवार्य कार्य है |  किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए inquiry रखी जा सकती है। Stock Exchange, Mutual Funds  और  जो व्यक्ति शेयर बाजार से जुड़े हुए हैं कभी भी सेबी में  बुलाए जा सकते हैं |

SEBI की HISTORY के बारे में जानकारी

SEBI ka full Form क्या है इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद अब हम इसकी history के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। SEBI की स्थापना पहली बार 1988 में शेयर बाजार को नियंत्रित करने के लिए की गई।  1992 में SEBI को संवैधानिक आधार दिया गया | SEBI  ने नियामक के रूप में व्यवस्थित सुधार लाने में एक बड़ी सफलता हासिल की है। सेबी की एक प्रशंसनीय उपलब्धि यह है कि इसने शेयर मार्केट को  electronic और  paperless बनाया | जुलाई 2001 में  T+5 rolling cycle का इस्तेमाल किया गया और 2003 में  T+2 rolling cycle उपयोग में लाया गया | T+2 rolling cycle का मतलब है कि trade date ( व्यापार तिथि)  के बाद केवल 2 दिन में प्रतिभूतियों के निपटारे (settlement of securities)  कर दिए जाएंगे | सेबी ने भौतिक प्रमाण पत्र (physical certificates) जारी करना बंद कर दिया है | यह प्रमाण पत्र डाक की सेवाओं में कई बार विलंबित होते थे और चोरी या  फेरफार  और जालसाजी का भी डर रहता था। India Rejuvenation Initiative ने सुप्रीम कोर्ट में एक PIL (Public Interest Litigation) दर्ज की थी जिसमें सेबी के सदस्यों Government Of India द्वारा चुने जाने पर चुनौती दर्ज की गई थी | Petition में कहा गया था कि  सेबी के चेयरमैन और उसके अन्य सदस्यों के चुनाव करने वाली committee में  फेरफार किया गया है | यह सेबी की भूमिका को नुकसान दे हो सकता है जो कि एक रक्षक के रूप में साबित की गई है | 2011 में कोर्ट ने  Petitioners को  Petition वापस लेने को कहा और एक नई  Petition फाइल करने के लिए कहा जिस में नियुक्तियों को लेकर संवैधानिक मुद्दे दर्ज करने के लिए कहा गया |

परन्तु, Chief Justice Of India ने  Finance Ministry  के आवेदन को इनकार कर दिया जो कि  PIL को खारिज करने के लिए  था और यह कहा कि वह पूरी जानकारी रखते हैं जो कुछ भी  SEBI  में हो रहा है | कई ऐसे मुद्दे सामने आए जहां कहा गया कि  SEBI  के चीफ  U.K.Sinha  और  Secretary to the President Of India, Omita Paul सेबी के काफी cases को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं और इनमें कई बड़ी companies के भी नाम शामिल हुए जैसे के Sahara Group, Reliance and Bank of Rajasthan. सेबी के प्रतिभूति विनिमय (securities exchange) के नए निर्देश अनुसार  कारोबार का net worth 100 करोड़ और annual trading 1000 करोड़ की होनी चाहिए | अगर वह यह निर्देश पूरा करने में असफल होते हैं तो 2 साल के अंदर उन्हें कारोबार से बाहर जाना पड़ेगा | 18 जुलाई 2013 को सेबी की नियामक शक्तियों (regulatory powers)  में वृद्धि करने के लिए President of India द्वारा एक अध्यादेश जारी किया गया जिसमें यह points थे :-

  1. जनता से 100 करोड़  से अधिक धनराशी जुटाने वाली सभी योजनायें अब SEBI के दायरे में लायी गयीं हैं।
  2. SEBI को तलाशी व संपत्ति से जुड़े किसी भी जब्ती के कार्य का अधिकार है |
  3. नियमों के पालन नहीं करने वाले को हिरासत में लेने का अधिकार है |
  4. देश विदेश के नियम को से सूचनाएं मांगने की अनुमति भी प्रदान की गई है |

SEBI का HEADQUARTER कहाँ स्थित है।

SEBI के उत्तर क्षेत्र के  headquarters Bandra Kurla Complex, Mumbai में है और इसके  regional offices जैसे पूर्वी ऑफिस Kolkata में दक्षिणी ऑफिस Chennai में और पश्चिमी ऑफिस Ahmadabad में स्थित है |  इसके लोकल ऑफिस जयपुर और बैंगलोर में स्थित है | SEBI  से पहले Controller of Capital Issues नाम का संगठन था जो कि शेयर बाजार के सारे कार्य संभालता था | SEBI  के सदस्य इस प्रकार हैं :-

  1. चेयरमैन जोकि GOVERNMENT OF INDIA nominate करती है
  2. फाइनेंस मिनिस्ट्री के दो सदस्य
  3. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का एक सदस्य और बाकी के 5 सदस्य भी GOVERNMENT OF INDIA nominate  करती है |

अजय त्यागी को सेबी के चेयरमैन 10 जनवरी 2017 को नियुक्त किया गया | SEBI  शेयर बाजार का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है , भारत में शेयर मार्केटिंग में निवेश करना हो या किसी भी प्रकार के Mutual Fund में निवेश करना हो तो SEBI द्वारा दिए गए निर्देश अवश्य ध्यान में रखें।

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