ISO का Full Form क्या होता है । ISO Full Form In Hindi

ISO एक ऐसा मार्क है जो सभी Electronic प्रोडक्टस, Services और हैल्थ Instruments इत्यादि पर देखने को मिलता है। लेकिन ISO (आईएसओ ) होता क्या है? ISO का full form क्या होता है और ISO क्या काम करता है? इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई? क्यों जरूरी है कंपनियों को  ISO के Certifications लेना और ISO का Headquarter कहाँ है? ISO Standards के फायदे क्या हैं? इनके साथ ही हम आपको यह भी बताएँगे कि कैसे मिलते हैं ISO Standards के Certificate?  क्या आप जानते हैं कि ISO के सबसे Latest Certificates कौन से हैं? इन सब Questions के जवाबों के अलावा ISO के बारे में पूरी जानकारी इस लेख में आपको मिलेगी।

iso ka full form kya hota hai

Iso full form in Hindi

ISO का Full Form है International Organization for Standardization और हिन्दी में इसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन के नाम से जाना जाता है। इसका Headquarter जिसे केन्द्रीय सचिवालय या Central Secretariat कहा जाता है, Geneva, Switzerland में है। ISO की तीन Official Languages इंग्लिश, फ्रेंच और Russian हैं। ISO ग्रीक isos (आइसोस) से लिया गया है, जिसका अर्थ बराबर है। देश चाहे जो भी हों, ISO को हर भाषा में ISO ही लिखा जाएगा। इसी अवधारणा को लेकर ISO का नाम दिया गया है।

ISO क्या है और ये क्या काम करता है?

ISO (अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन)) अलग-अलग देशों की राष्ट्रीय मानक संस्थाओं का एक विश्वव्यापी संघ है। आईएसओ एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।162 देशों की राष्ट्रीय मानक संस्थाएं इसकी सदस्य हैं। ISO अंतर्राष्ट्रीय मानकों को विकसित और Publish करता है। इसके लिए ISO अपने सदस्यों के साथ मिलकर विशेषज्ञों की टीमों द्वारा स्वैच्छिक, आम सहमति के आधार पर, बाजार प्रासंगिक अंतर्राष्ट्रीय मानक विकसित करता है जो Innovation का समर्थन कर उसे बढ़ावा देते हैं और Global Challenges के लिए Solution प्रदान करते हैं। ISO द्वारा बनाए गए Standards  गुणवत्ता, सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए उत्पादों, सेवाओं और प्रणालियों के लिए World Class Specification देते हैं। इन Specifications का उपयोग दुनिया भर की सरकारें, प्राइवेट कंपनियाँ और agencies अपने Products और सेवाओं की गुणवत्ता और मानक निर्धारित करने के लिए करती हैं। उदाहरण के लिए यदि हम कोई Electric Device खरीदते हैं और उसपर ISO मानक का निशान लगा हुआ है तो हम निश्चित रूप से उसकी Quality और Safety पर भरोसा कर सकते हैं। ISO अलग-अलग क्षेत्र की सेवाओं और उपकरणों के लिए अलग-अलग ISO मानक तय करता है।  ISO  ने 22341 (September 2018 तक ) अंतर्राष्ट्रीय मानकों और संबंधित दस्तावेजों को प्रकाशित किया है, जिसमें लगभग हर उद्योग, प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा, कृषि और स्वास्थ्य देखभाल जैसे Sectors को शामिल किया गया है। आईएसओ (ISO ) अंतर्राष्ट्रीय मानक हर जगह, हर किसी को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं। यहाँ तक की जिस laptop या कम्प्युटर पर आप यह website देख रहें हैं, उसने भी ISO Certification लिया होगा। भारत का Bureau of Indian Standards (BIS ), भारतीय मानक ब्यूरो, ISO में इंडिया का प्रतिनिधित्व करता है।

ISO History in hindi

ISO की शुरुआत 1946 में हुई जब 25 देशों के प्रतिनिधियों ने लंदन में सिविल इंजीनियर्स संस्थान में मुलाकात की और Industrial मानकों के अंतर्राष्ट्रीय समन्वय और एकीकरण की सुविधा के लिए एक नया अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनाने का फैसला किया। 23 फरवरी 1947 को ISO ने आधिकारिक तौर पर कार्य करना शुरू किया। आईएसओ एक स्वैच्छिक संगठन है। स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में ISO के केंद्रीय सचिवालय में 135 से अधिक लोग Permanently काम करते हैं।

ISO ने 1 9 51 में अपना पहला मानक, ISO/R 1:1951 (Standard Reference Temperature for Industrial Length Measurements) आईएसओ / आर 1: 1 9 51 (औद्योगिक लंबाई माप के लिए मानक संदर्भ तापमान) प्रकाशित किया था। ISO के Certifications  Weight और Measures जैसी चीजों से शुरू हुए , और पिछले 66 वर्षों से ज्यादा समय में मानकों के एक परिवार के रूप में विकसित हो चुके है। हमारे जूते से लेकर Wi-Fi (वाई-फाई) नेटवर्क तक आज सभी चीजों के लिए ISO मानक उपलब्ध हैं।

ISO Certificates के फायदे / Benefits of ISO Certificates

ISO (आईएसओ) की स्थापना एक मौलिक प्रश्न का उत्तर देने के विचार से की गई थी: “ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?” यानि कि किसी काम में वो कौन से मानक हैं जो उस काम की श्रेष्ठता को बताएँगे। अंतर्राष्ट्रीय मानकों का मतलब है कि Customers को विश्वास है कि उनके उत्पाद सुरक्षित, विश्वसनीय और अच्छी गुणवत्ता के हैं। ये किसी भी Product को मार्केट में Credibility प्रदान करता है। जिन कंपनियों ने ISO Certifications लिए हैं उनकी बिक्री भी ज्यादा होती है। ISO Certificates के कुछ महत्वपूर्ण फायदे:

  • आपकी सभी प्रक्रियाओं का मूल्यांकन और मानकीकरण होता है;
  • समस्याएं अधिक तेज़ी से मालूम होती हैं और समाधान में सुधार होता है;
  • सुरक्षा और गुणवत्ता में सुधार के साथ ग्राहक संतुष्टि बढ़ाना;
  • ISO Certificate आपकी कंपनी की मार्केट में बेहतर image बनाता है;
  • Regulators (विनियामक) और सरकारें बेहतर Regulation विकसित करने में मदद के लिए ISO मानकों पर भरोसा करती हैं;
  • ये अंतर्राष्ट्रीय मानक केवल आर्थिक लाभ ही नहीं पहुंचाते बल्कि हवा, पानी, मिट्टी, गैसों और Radiation के Emission और अलग-अलग Products के पर्यावरण के ऊपर प्रभावों को भी नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इससे मनुष्यों और पृथ्वी के स्वस्थ्य की रक्षा होती है। ISO पर्यावरण के प्रति भी सजग है;
  • जिन Products पर ISO Certificates की मोहर लगी है आप उसका इस्तेमाल भरोसे और विश्वास के साथ कर सकते हैं; और
  • सिस्टम और प्रक्रियाओं में सुधार के माध्यम से लागत का कम होना इत्यादि।

ISO के Important Certificates कौन से हैं

  1. ISO Certificate                                      Area/Sector
  2. ISO 9001                          –                    Quality Management
  3. ISO 27000                        –                    Information Technologies
  4. ISO 14000                        –                    Environmental Management
  5. ISO 13485                        –                    Medical Devices
  6. ISO 639                            –                    Language Codes
  7. ISO 20121                        –                    Sustainable Events
  8. ISO 31000                        –                    Risk Management
  9. ISO 5001                           –                   Energy Management
  10. ISO 22000                         –                   Food Safety Management

ISO 22000 जो कि Food Safety मैनेजमेंट से संबन्धित हैं, ISO द्वारा जारी किए गए सबसे Latest Standards हैं। ये Standard फूड production और Safety के मानकों को तय करता है।

ISO मानकों को कैसे विकसित करता है

पहले प्रस्ताव से अंतिम प्रकाशन तक, Standards  विकसित करने में ISO को आमतौर पर लगभग 3 साल लगते हैं। ISO स्वयं तय नहीं करता है कि एक नया मानक कब विकसित करना है, बल्कि उद्योग या उपभोक्ता समूहों या अन्य Stakeholders के अनुरोध पर कार्य करता है। ISO मानकों को दुनिया भर के विशेषज्ञों के समूहों द्वारा विकसित किया जाता है। ये समूह ISO की बड़ी  Technical Committee के सदस्य होते हैं। ये विशेषज्ञ मानक के सभी पहलुओं, जैसे कि उसका Scope, Definition और Content इत्यादि पर चर्चा कर के Draft तैयार करते हैं। सभी निर्णय Voting की प्रक्रिया से होते हैं। ISO मानकों को Develop करना एक consensus-based approach है जिसमे सभी लोगों की राय ली जाती है।

ISO Certificate लेने की पूरी Process  

ISO सर्टिफिकेट लेने के लिए सबसे पहले आपको ये निश्चित करना होगा की आपको ISO के किस सर्टिफिकेट की जरूरत है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ISO स्वयं कंपनियों को Certificate (प्रमाणीकरण) प्रदान नहीं करता है। सर्टिफिकेशन External Bodies द्वारा किया जाता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप मान्यता प्राप्त और विश्वसनीय Certification Bodies का चयन करें। इसे ISO Registrar भी कहा जाता है। इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए की ये Certification Bodies ISO के CASCO Standards का पालन कर रहें हैं की नहीं। इसके बाद ISO Auditor आपकी कंपनी का ISO Standards की योग्यता का निरीक्षण करेगा। उसके द्वारा बताई गई कमियों को एक एक्शन प्लान बनाकर दूर कर लेना चाहिए। इस तरह जब ISO ऑडिटर आपकी कंपनी की प्रक्रियाओं और गुणवत्ता से संतुष्ट हो जाएगा तो आपकी फ़ाइनल रिपोर्ट Registrar के पास भेज दी जाती है। Registrar आपको ISO Certificate प्रदान करता है। इस पूरी प्रक्रिया में, आपकी कंपनी की साइज़ के हिसाब से, लगभग 6 महीने से 15 महीनों तक का समय लगता है।

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